
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण: मांग को लेकर को लेकर उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र
अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में कार्रवाई होने बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग उठने लगी है, इसी मांग को लेकर उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने शविवार को प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा है। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र भेजकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर उसके व्यापक एवं सर्वस्वीकार्य पुनर्गठन की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि मंदिर करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सदियों के संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्था से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया सर्वोच्च पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनविश्वास के अनुरूप होनी चाहिए।
शरद शुक्ला ने पत्र में उल्लेख किया है कि हाल के समय में ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न विवादों, कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों, जांच एजेंसियों की कार्रवाई, गिरफ्तारियों तथा ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों जैसी घटनाओं ने करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में स्वाभाविक रूप से अनेक प्रश्न और चिंताएं उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोप का अंतिम सत्य न्यायिक एवं विधिक प्रक्रिया से ही स्थापित होता है, किंतु जब देश की सर्वोच्च आस्था के केंद्र से जुड़े संस्थान पर लगातार प्रश्न उठ रहे हों, तब केवल कानूनी प्रक्रिया ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जनविश्वास की पुनर्स्थापना भी उतनी ही आवश्यक होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना न्यूनतम हो तथा श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उनका यह पत्र किसी व्यक्ति, समूह अथवा विचारधारा के विरोध में नहीं है, बल्कि श्रीरामजन्मभूमि मंदिर की गरिमा, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था तथा इस पवित्र संस्थान की निष्कलंक प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण बनाए रखने की भावना से लिखा गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इस विषय की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यक एवं उचित निर्णय करेगी, जिससे श्रीरामजन्मभूमि मंदिर की व्यवस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और आदर्श प्रशासन का उदाहरण बन सके।
ट्रस्ट को किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने की भी मांग
उन्होंने भेजे गए पत्र में कुछ सुझाव भी दिए हैं, अपने सुझावों में उन्होंने पुनर्गठित ट्रस्ट में चारों पूज्य शंकराचार्यों, श्री रामानंद संप्रदाय के प्रतिनिधि, श्रीरामजन्मभूमि प्रकरण में न्यायालय में दीर्घकाल तक पक्ष रखने वाले प्रतिनिधि, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, प्रमुख धार्मिक अखाड़ों के पीठाधीश, समाज, धर्म, शिक्षा एवं सुशासन के प्रतिष्ठित व्यक्तियों, अयोध्या धाम के संतों तथा शहीद कारसेवकों के एक परिजन को प्रतिनिधित्व देने का सुझाव दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि ट्रस्ट को किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए।

